Dhanada Yakshini Sadhna – 21 Dayds Powerful & Secret Tantric Practice | धन, समृद्धि और ऐश्वर्य प्राप्ति की तांत्रिक साधना

Dhanada yakshini sadhna

Dhanada Yakshini Sadhna – 21 Dayds Powerful & Secret Tantric Practice | धन, समृद्धि और ऐश्वर्य प्राप्ति की तांत्रिक साधना

धनदा यक्षिणी साधना – धन और समृद्धि प्रदान करने वाली दिव्य तांत्रिक साधना

Dhanada Yakshini Sadhna: भारतीय तांत्रिक परंपरा में यक्ष और यक्षिणियाँ अत्यंत शक्तिशाली दिव्य शक्तियों के रूप में वर्णित हैं। यह शक्तियाँ सूक्ष्म लोकों में निवास करती हैं और योग्य साधक को धन, ऐश्वर्य, सिद्धि तथा जीवन में उन्नति प्रदान कर सकती हैं।

इन्हीं यक्षिणियों में एक विशेष साधना है धनदा यक्षिणी साधना, जिसे धन और समृद्धि प्राप्ति की शक्तिशाली तांत्रिक साधना माना जाता है।

“धनदा” का अर्थ है धन देने वाली। इसलिए धनदा यक्षिणी को ऐसी दिव्य शक्ति माना जाता है जो साधक के जीवन में आर्थिक उन्नति, व्यापार में सफलता और समृद्धि के मार्ग खोल सकती है।

लेकिन तांत्रिक परंपरा के अनुसार यह साधना केवल गुरु दीक्षा और उचित मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए


Dhanada Yakshini Sadhna का आध्यात्मिक महत्व

धनदा यक्षिणी को धन और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री शक्ति माना जाता है। तांत्रिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इनकी साधना से साधक के जीवन में निम्न प्रकार के परिवर्तन हो सकते हैं:

  • आर्थिक बाधाओं का निवारण

  • व्यापार और व्यवसाय में उन्नति

  • अचानक धन के अवसर उत्पन्न होना

  • आर्थिक स्थिरता और समृद्धि

  • जीवन में ऐश्वर्य और सुख-सुविधाओं का आगमन

यह साधना केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में अवसरों और समृद्धि के प्रवाह को सक्रिय करने वाली साधना भी मानी जाती है।


गुरु दीक्षा क्यों आवश्यक है?

तांत्रिक साधना में गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से यक्षिणी साधना जैसी सूक्ष्म साधनाओं में गुरु मार्गदर्शन अनिवार्य होता है

धनदा यक्षिणी साधना में:

  • साधना का मंत्र गुरु से दीक्षा द्वारा प्राप्त करना आवश्यक होता है

  • साधना से पहले शक्तिपात (Energy Transmission) होता है

  • साधना में उपयोग होने वाली यक्षिणी माला और चित्र प्राण-प्रतिष्ठित होना चाहिए

इस साधना के लिए उपयोग होने वाली सिद्ध यक्षिणी माला और धनदा यक्षिणी का चित्र पूज्य सद्गुरुदेव स्वामी कमलेश्वरानन्द जी द्वारा प्राण प्रतिष्ठित होना चाहिए

इसलिए साधना शुरू करने से पहले साधकों को आश्रम से संपर्क करके उचित मार्गदर्शन और रजिस्ट्रेशन करना चाहिए


Dhanada Yakshini Sadhna Samagri

धनदा यक्षिणी साधना के लिए सामान्यतः निम्न सामग्री आवश्यक होती है:

  • प्राण प्रतिष्ठित धनदा यक्षिणी चित्र

  • सिद्ध यक्षिणी माला

  • पीला आसन

  • पीले वस्त्र (धोती या साड़ी)

  • धूप या अगरबत्ती

  • घी या तिल तेल का दीपक

  • कुमकुम

  • अक्षत

  • सुगंधित पुष्प (गुलाब)

यह सभी सामग्री साधना में उपयोग होती है और विशेष रूप से सिद्ध माला और प्राण-प्रतिष्ठित चित्र आवश्यक होते हैं


Dhanada yakshini sadhna

धनदा यक्षिणी साधना विधि

(पूज्य सद्गुरुदेव स्वामी कमलेश्वरानन्द जी द्वारा प्रदत्त साधना विधान के अनुसार)

1. साधना प्रारंभ करने का समय

यह ११ दिवसीय शुक्रवार साधना है और इसे रात्रि 9 बजे के बाद प्रारंभ किया जाता है।


2. साधक की तैयारी

साधक को स्नान करके पीले वस्त्र धारण करने चाहिए और पीले आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए


3. साधना स्थान की व्यवस्था

अपने सामने चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर निम्न वस्तुएँ स्थापित करें:

  • सद्गुरुदेव का चित्र

  • धनदा यक्षिणी का प्राण प्रतिष्ठित चित्र

  • सिद्ध यक्षिणी माला

सामने एक प्लेट में सुगंधित गुलाब के पुष्प रखें।


4. दीप और धूप

धूप या अगरबत्ती जलाएँ और अपनी बाईं ओर घी या तिल तेल का दीपक रखें।


5. प्रारंभिक पूजन

इसके बाद:

  • पवित्रीकरण

  • गणपति पूजन

  • गुरु स्मरण

करके गुरु मंत्र का जप किया जाता है और गुरु माला धारण की जाती है।


6. यक्षिणी पूजन

अब धनदा यक्षिणी चित्र का पूजन करें जिसमें:

  • कुमकुम

  • अक्षत

  • पुष्प

  • धूप

  • दीप

अर्पित किए जाते हैं।


7. चंदन धारण

पूजन के बाद साधक स्वयं को चंदन लगाता है।


8. मंत्र जप

अब साधक सिद्ध यक्षिणी माला से मूल मंत्र की पाँच माला जप करता है

⚠️ यह मंत्र सार्वजनिक रूप से नहीं लिखा जाता क्योंकि यह गुरु दीक्षा और शक्तिपात द्वारा ही प्राप्त किया जाता है

जप के बाद माला को पूरी रात गले में धारण करके रखा जाता है


9. साधना पूर्णता

ग्यारहवें दिन साधना पूर्ण होने पर साधक को अपनी धन प्राप्ति की मनोकामना के लिए प्रार्थना करनी चाहिए और गुरु आरती तथा क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए


दीक्षा कैसे प्राप्त करें?

धनदा यक्षिणी साधना करने के लिए साधक को गुरु से दीक्षा लेना आवश्यक है

साधकों के लिए तीन विकल्प उपलब्ध होते हैं:

1️⃣ साधना शिविर में दीक्षा

साधक गुरुदेव के सत्संग या साधना शिविर (Satsang / Sadhna Camp) में भाग लेकर रजिस्ट्रेशन के माध्यम से दीक्षा प्राप्त कर सकता है।

2️⃣ आश्रम में व्यक्तिगत दीक्षा

साधक आश्रम में आकर गुरुदेव से व्यक्तिगत अपॉइंटमेंट लेकर दीक्षा प्राप्त कर सकता है

3️⃣ घर बैठे फोन कॉल द्वारा दीक्षा

यदि साधक दूर है और आश्रम आना संभव नहीं है, तो वह गुरुदेव से फोन पर one-to-one सत्र द्वारा दीक्षा और शक्तिपात प्राप्त कर सकता है

यह सत्र सामान्यतः 30–40 मिनट का व्यक्तिगत कॉल सेशन होता है।

यदि साधक दूर है तो घर बैठे दीक्षा लेना भी पूर्ण रूप से उचित माना जाता है


क्या इस साधना में प्रत्यक्षीकरण संभव है?

इस साधना की दीक्षा में प्रत्यक्षीकरण की पूर्ण संभावना होती है, लेकिन इसके लिए साधक में निम्न गुण आवश्यक हैं:

  • गुरु के प्रति श्रद्धा

  • साधना के प्रति 100% समर्पण

  • धैर्य

  • नियमित और निरंतर साधना

कई बार साधना को बार-बार दोहराना पड़ सकता है

जब साधक साधना प्रारंभ करता है तब आगे की प्रक्रिया में गुरुदेव स्वयं व्यक्तिगत रूप से साधक का मार्गदर्शन करते हैं


साधकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

  • साधना बिना गुरु दीक्षा के न करें

  • साधना का मंत्र केवल गुरु से प्राप्त करें

  • सिद्ध यक्षिणी माला और चित्र प्राण प्रतिष्ठित होना चाहिए

  • साधना शुरू करने से पहले आश्रम से संपर्क करें

सद्गुरु के मार्गदर्शन में की गई साधना ही सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती है।

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