Kamleshwaram " BRAHMAVANI " Prem Pant

200.00

चमत्कृत, अलौकिक, अवतरित ब्रह्म साक्षात्कार से पूर्ण, दिव्य अध्यात्मिक ग्रंथ – ” ब्रह्मवाणी “….

चमत्कृत, अलौकिक, अवतरित ब्रह्म साक्षात्कार से पूर्ण, दिव्य अध्यात्मिक ग्रंथ – ” ब्रह्मवाणी “…. पृत्वी पर हजारों वर्षों बाद एक और दिव्य ग्रंथ का प्रादुर्भाव..निष्काम और निश्चलता की घोतक..दिव्यतम, ओजस्वितम “ब्रह्म” की ” ब्रह्मवाणी “…. ज्ञान, प्रेम, भाव, भक्ति स्नेह, करुणा, दया..गुरु की कारुणिक कृपा, गुरु ही सर्वभाव..मुझ अंतर्यामी को एहसास करने का माध्यम..मैं हर बार अन्य ग्रंथों के रूप में आया..मुझे कोई भी नाम दे दो, “मैं” तो बस मैं ही होता हूँ..एक बार फिर लम्बे अंतराल के बाद, “ब्रह्मवाणी” के रूप में आप सभी के बीच ….

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